क्या बदला
फ्रांस 24 की रिपोर्टिंग के अनुसार, क्रेमलिन का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक घंटे चली फोन वार्ता में व्लादिमीर पुतिन से कहा कि वे यूक्रेन युद्ध का जल्द अंत चाहते हैं। क्रेमलिन के सहायक यूरी उशाकोव ने कहा कि पुतिन ने इस रुख का समर्थन किया। सप्ताहांत में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने मॉस्को और कीव का दौरा किया था; लेकिन युद्धविराम, समयसीमा या अमल की शर्तों की कोई घोषणा नहीं हुई।
यह क्यों मायने रखता है
राष्ट्रपतियों के बीच बातचीत आगे बढ़ने का दबाव बना सकती है, लेकिन वह अपने-आप मिसाइलों को नहीं रोक सकती, सेनाओं को अलग नहीं कर सकती या उन शर्तों का निपटारा नहीं कर सकती जिन पर रूस और यूक्रेन अब भी असहमत हैं। तत्काल व्यावहारिक सवाल यह है कि क्या इससे ऐसे नियमों वाली वार्ता शुरू होगी जो जमीन पर टिक सकें।
हमारा आकलन (सूचित अनुमान): लड़ाई के तत्काल रुकने की तुलना में अधिक कूटनीतिक संपर्क की संभावना ज्यादा है। यदि लागू कराने पर सहमति के बिना वार्ता फिर शुरू होती है, तो हमले झेल रहे इलाकों के नागरिक जोखिम में बने रहेंगे और कूटनीति के साथ सैन्य अभियान जारी रह सकते हैं। यदि पक्षकार व्यवहार्य और निगरानी वाले संघर्षविराम पर पहुंचते हैं, तो लाभ बेहद सीधा है: सक्रिय युद्ध की चपेट में आने वाले लोग कम होंगे। अमेरिका-रूस व्यापार बहाल करने के लिए क्रेमलिन की प्रस्तावित पहल इसी कहीं बड़ी शर्त के पूरा होने पर निर्भर करती है।
ऐतिहासिक समानांतर
सबसे निकट और उपयोगी मिसाल 1953 का कोरियाई युद्धविराम समझौता है। उसमें भी मूल राजनीतिक संघर्ष सुलझने से पहले बड़े पैमाने की लड़ाई रोकने का प्रयास किया गया था और सुरक्षा व्यवस्था में एक बाहरी शक्ति की केंद्रीय भूमिका थी।
लेकिन वास्तविक अंतर बहुत बड़ा है: कोरिया में हस्ताक्षरित युद्धविराम, विसैन्यीकृत बफर क्षेत्र और पर्यवेक्षण निकाय बने; यह रिपोर्ट केवल एक फोन वार्ता और शुरुआती कूटनीति का वर्णन करती है। कोरियाई युद्धविराम ने बड़े पैमाने की लड़ाई रोक दी, लेकिन शांति संधि नहीं बनाई; इससे प्रायद्वीप विभाजित रहा और तकनीकी रूप से युद्ध की स्थिति में बना रहा, जैसा कि बाद में एपी ने उल्लेख किया। इससे संकेत मिलता है कि अब निर्णायक रूप से यह देखना होगा कि किसी भी विराम के साथ सेनाओं का अलगाव, निगरानी और अमल की व्यवस्था आती है या नहीं, न कि केवल वार्ता की गर्मजोशी।
प्रभाव कैसे फैल सकते हैं
यदि राष्ट्रपतियों के बीच यह संवाद रूस-यूक्रेन-अमेरिका वार्ता के फिर शुरू होने की ओर ले जाता है, तो वार्ताकार सैन्य अभियानों को रोकने की दिशा में काम शुरू कर सकते हैं। यदि इन वार्ताओं से लागू कराई जा सकने वाली शर्तें निकलती हैं और दोनों पक्ष उनका पालन करते हैं, तो हमले झेल रहे नागरिकों का जोखिम कुछ हफ्तों में घट सकता है।
यह क्रम तब टूट जाएगा यदि पक्ष अपने मतभेद पाट नहीं पाते, शर्तों पर कभी सहमति नहीं बनती, या कूटनीतिक संपर्क के बावजूद हमले जारी रहते हैं। रिपोर्ट कहती है कि हाल के महीनों में हमले तेज हुए हैं, इसलिए मंशा की घोषणा सीढ़ी का केवल पहला पायदान है।
प्रभाव आकलन
- यूक्रेन: आने वाले हफ्तों में जोखिम में। शुरुआती कूटनीति से वार्ता की ओर अमेरिका-नेतृत्व वाला बदलाव उसके मोलभाव के माहौल को बदल सकता है, लेकिन अभी समझौते की कोई शर्त पेश नहीं की गई है।
- रूस: लंबी अवधि में मिश्रित स्थिति। संघर्ष समाप्त करने की व्यवस्था अमेरिका-रूस संबंध बहाल करने के क्रेमलिन के घोषित लक्ष्य को आगे बढ़ा सकती है, जबकि युद्ध की अनसुलझी शर्तें बाधा बनी हुई हैं।
- संघर्ष-प्रभावित इलाकों के नागरिक: अभी जोखिम में। उनकी सुरक्षा तभी बेहतर होगी जब बातचीत से तय विराम का व्यवहार में पालन हो।
परिदृश्य
सबसे संभावित: यदि दूतों के कामकाज के सकारात्मक आकलन से एक और वार्तात्मक संपर्क होता है, लेकिन परस्पर स्वीकार्य युद्धविराम ढांचा नहीं बनता, तो सैन्य अभियान दिनों से हफ्तों तक जारी रहेंगे। यही आधारभूत परिदृश्य है क्योंकि रिपोर्ट कहती है कि रूस और यूक्रेन के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। युद्धविराम की शर्तों के बिना एक और कूटनीतिक बैठक और साथ में जारी हमले इसे मजबूत करेंगे; सहमत अमल की शर्तें और लंबे समय तक तनाव में कमी इसे कमजोर करेंगी।
सकारात्मक: यदि नई वार्ता से शत्रुता रोकने की शर्तें और विश्वसनीय निगरानी, अलगाव या अमल की व्यवस्था बनती है, तो कुछ हफ्तों में बड़ी लड़ाई कम हो सकती है। इससे नागरिकों का जोखिम घटेगा और क्रेमलिन द्वारा चर्चा की गई आर्थिक बहाली की दिशा में व्यावहारिक रास्ता खुलेगा। प्रकाशित शर्तें, निगरानी की व्यवस्था और हमलों में लगातार कमी इस रास्ते का समर्थन करेंगी।
नकारात्मक: यदि पक्ष अपने मतभेद पाट नहीं पाते, तो यह फोन वार्ता उम्मीदें बढ़ा सकती है, जबकि युद्धक्षेत्र की स्थिति अपरिवर्तित रहे या और बिगड़ जाए। नागरिक जोखिम में बने रहेंगे और अमेरिका-रूस आर्थिक संबंधों का कोई भी व्यावहारिक सामान्यीकरण टल जाएगा। तीन-पक्षीय प्रारूप का फिर शुरू न होना, और अधिक तनाव तथा सहमत शर्तों का अभाव इसी दिशा का संकेत देंगे।
आगे क्या देखना है
- रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच तीन-पक्षीय वार्ता फिर शुरू होने की सार्वजनिक घोषणा।
- युद्धविराम की ऐसी शर्तें जो यह स्पष्ट करें कि विराम को कैसे लागू, निगरानी या सत्यापित किया जाएगा।
- किसी भी बातचीत से तय व्यवस्था के बाद रिपोर्ट किए गए हमलों में लंबे समय तक कमी आती है या नहीं।
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